चेस्टर हिल जमीन घोटाला: संकट में मुख्य सचिव की कुर्सी, 275 बीघा जमीन होगी सरकारी?

चेस्टर हिल जमीन घोटाला: संकट में मुख्य सचिव की कुर्सी, 275 बीघा जमीन होगी सरकारी?

Chief Secretarys Post in Jeopardy

Chief Secretary's Post in Jeopardy

शिमला। Chief Secretary's Post in Jeopardy, हिमाचल प्रदेश के चर्चित चेस्टर हिल जमीन विवाद में उपायुक्त सोलन ने हिमाचल प्रदेश काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के उल्लंघन को लेकर 275 बीघा जमीन को सरकार के नाम दर्ज (वेस्ट) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आवश्यक कागजात तैयार करने के साथ-साथ सभी तथ्यों की जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।

इस प्रकरण ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा मोड़ ले लिया है, जिससे प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। 

उनका आदेश, जो छह दिसंबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने एसडीएम और उपायुक्त की कार्रवाई को रोकने का निर्देश दिया था, इस संकट का बड़ा आधार माना जा रहा है। कानून के जानकारों के अनुसार, ऐसे आदेश रोकने का अधिकार केवल जिला न्यायालय के पास होता है।

प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न

चेस्टर हिल मामला अब एक साधारण जमीन विवाद से बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न बन चुका है। मुख्य सचिव का पत्र वापस लेना इस बात का संकेत है कि सरकार अब डैमेज कंट्रोल और सख्त कार्रवाई के मूड में है। आने वाले दिनों में डीसी सोलन की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा और दोषियों की जिम्मेदारी तय करेगी।

धारा 118 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई का आदेश

प्रदेश सरकार ने शनिवार को उपायुक्त सोलन को नियम 118 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई करने के आदेश जारी कर मुख्य सचिव के आदेशों को दरकिनार कर दिया था। 

नगर निगम ने दिए थे गिराने के आदेश

इस मामले में आयुक्त नगर निगम सोलन की तरफ से भवन को गिराने के आदेश भी जारी किए गए थे। जब कार्रवाई शुरू की गई, तो मुख्य सचिव को एक सीपीसी 151 के तहत पत्र दिया गया, जिसमें अधिकारियों द्वारा धारा 118 के उल्लंघन को लेकर प्रताड़ित करने की बात उठाई गई। इस संबंध में, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व केके पंत के अवकाश पर होने के कारण मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आदेश जारी कर सरकार के नाम (वेस्ट) करने की प्रक्रिया को रोक दिया था। इससे जांच प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई थी।

खामियों की पुष्टि के बावजूद कार्रवाई रोकी

एसडीएम स्तर पर हुई जांच में जमीन के लेन-देन में गंभीर खामियों की पुष्टि होने के बावजूद दिसंबर में कार्रवाई रोक दी गई। यही निर्णय अब विवाद का केंद्र बन गया है। मुख्य सचिव के इन आदेशों को सरकार ने रोक दिया है।

कैसे आया मामला सामने 

20 अगस्त, 2024 को राजीव शांडिल ने शिकायत की, जिसमें कहा गया कि चेस्टर हिल में 275 बीघा जमीन धारा 118 के तहत वहां के उन लोगों के नाम पर खरीदी गई, जिनके पास दो-दो बीघा से भी कम जमीन है। इसमें बाहरी लोगों का पैसा लगा है। इस संबंध में एसडीएम सोलन डा. पूनम को जांच सौंपी गई, जिन्होंने मौके का जायजा लेने के साथ सभी तथ्यों की जांच की। चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट जमीन हस्तांतरण और धारा 118 के उल्लंघन का मामला है। बाहरी व्यक्तियों को नियमों के विरुद्ध जमीन दी गई। 

एसडीएम जांच रिपोर्ट के मुख्य तथ्य

  • जमीन सौदों में धारा 118 का उल्लंघन पाया गया।
  • जिसको करोड़ों रुपये की जमीन का मालिक बताया, उसके आय के कम स्रोत।
  • दिखावटी मालिकाना हक, जिसमें स्थानीय किसान के नाम पर जमीन जबकि गैरकृषक फर्म बना रही फ्लैट।
  • वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं, जिसमें फ्लैट खरीदारों से करोडों की राशि सीधे डेवलपर के खाते में आए।
  • दस्तावेजों में प्रक्रियात्मक खामियां और विसंगतियां।
  • रेरा के निर्धारित नियमों की अवहेलना।
  • स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही व मिलीभगत की आशंका।
  • जमीन को सरकार में वेस्ट करने की सिफारिश।

सरकार के उपायुक्त सोलन को निर्देश

  • पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जाए।
  • एसडीएम की रिपोर्ट सहित सभी रिकार्ड का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
  • सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
  • यदि धारा 118 का उल्लंघन पाया जाता है तो जमीन राज्य सरकार में नाम (जब्त) की जाए।
  • जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।

90 प्रतिशत राशि डेवेलपर के खाते में

चेस्टर हिल में बनने वाले फ्लैट को बिक्री से आने वाली राशि का 90 प्रतिशत डिवेलपर के खाते में और दस प्रतिशत किसान जिनके नाम पर जमीन उसके खाते में आने को लेकर जांच में बात सामने आई है। 

ईडी जांच तक की हुई थी सिफारिश

सूत्रों के अनुसार इस सारे प्रकरण को लेकर ईडी की जांच तक की सिफारिश की गई है। जिसका मुख्य कारण बेनामी पैसों का परियोजना में इस्तेमाल बताया जा रहा है। हालांकि यह तो तब सामने आएगा जब इस संबंध में गहनता से जांच होगी कि आखिर जमीन को खरीदने से लेकर निवेश पर पैसा कहां से लगा है।

सीबीआइ जांच के लिए कल जाएंगे हाई कोर्ट 

चेस्टर हिल भूमि को लेकर मुख्य सचिव द्वारा पद के दुरुपयोग और खरड की करोडों की जमीन को मात्र डेढ़ करोड़ में खरीदे जाने को लेकर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सीबीआइ लांच की मांग की जाएगी। इस संबंध में सारे दस्तावेज जुटाए गए हैं। थाना छोटा शिमला में शिकायत दर्ज करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एसडीएम और आयुक्त के कार्रवाई आदेशों को मुख्य सचिव नहीं रोक सकता। इन्हें केवल जिला न्यायालय द्वारा रोका जा सकता था। छह दिसंबर को जो आदेश दिए गलत हैं। यही नहीं खरड़ की जमीन जिसकी कीमत 70 करोड़ से अधिक है उसे डेढ़ करोड़ में खरीदा दिखाया। इसकी जांच होनी चाहिए। 
-विनय शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। 

मुख्य सचिव ने आरोपों को बताया है झूठ

प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि उनपर झूठे आरोप लगए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी को रोकने के लिए नहीं कहा था। इसके लिए जिला उपायुक्त ही योग्य हैं। इस संबंध में अपील भी तो की जा सकती थी। पत्रकार वार्ता में पहले ही सारी स्थिति स्पष्ट कर चुका हैं।